What is Transistor chip in hindi | ट्रांजिस्टर चिप क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में

 क्या आपको पता है कि Transistor क्या होता है? Transistor कितने प्रकार का होता है? Transistor का उपयोग क्या क्या है? Transistor कैसे काम करता है? अगर नही तो आप सही जगह पर आए हैं। इन सारे सवालों के जवाब इस पोस्ट में जानेंगे तो चलिए शुरू करते हैं….

What is Transistor chip in hindi | ट्रांजिस्टर चिप क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में
What is Transistor chip in hindi | ट्रांजिस्टर चिप क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में

Transistor दिखने में बहुत छोटा और साधारण सा Device होता है लेकिन इसका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। ट्रांजिस्टर के कारण ही मोबाइल और कंप्यूटर में हम इतनी तेजी से काम कर पाते हैं। बिना ट्रांजिस्टर के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाना संभव नहीं है। ट्रांजिस्टर का सबसे ज्यादा यूज amplification के लिए किया जाता है।

What is Transistor | ट्रांजिस्टर क्या है

Transistor एक ऐसा अर्द्धचालक electronic device है जिस का यूज़ electronic signal और electricity को amplify करने के लिए किया जाता है। 

ट्रांजिस्टर अर्द्धचालक पदार्थ से मिलकर बनता है। ट्रांजिस्टर को बनाने केेेेे लिए ज्यादातर सिलिकॉन, germanium का प्रयोग किया जाता है। Transistor तीन सिरे या टर्मिनल होते हैं। जिसका इस्तेमाल दूसरे सर्किट को जोड़ने में किया जाता है।

ट्रांजिस्टर के तीन टर्मिनल होते हैं base, Collector, और Ammeter. ट्रांजिस्टर की किसी pair में करंट या वोल्टेज डालने पर दूसरे ट्रांजिस्टर के जोड़ी में करंट बदल जाता है। बहुत सारे डिवाइसेज में ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल जैसे कि एंपलीफायर, स्विच सर्किट, ओसी लेटर इत्यादि। 

Who invented the transistor | ट्रांजिस्टर का आविष्कार किसने किया था?

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि ट्रांजिस्टर का आविष्कार किसने किया था हम बताते हैं जर्मनी के भौतिक वैज्ञानिक Julius Edgar Lilienfeld कनाडा में पेटेंट के लिए 1925 फील्ड इफेक्ट ट्रांसिस्टर प्रार्थना पत्र एप्लीकेशन दिया था लेकिन सबूतों के कमी के कारण इसको स्वीकार नहीं किया गया। लेकिन बाद में ट्रांजिस्टर का आविष्कार Jihon Bardeen, Walter Brattain और wilium Shokly ने 1947 में किया था।

Use of transistors | ट्रांजिस्टर के उपयोग

ट्रांजिस्टर सस्ते होते हैं इसीलिए इसका यूज कहीं पर भी किया जा सकता है। यह तेजी से काम करते हैं और कैथोड हीटर के द्वारा पावर का लॉस भी नहीं होता। ट्रांजिस्टर के लाइफ बहुत लंबी होती है और जल्दी खराब भी नहीं होते। ट्रांजिस्टर का न्यूज़ एक सूरज की तरह होता है और यह एंपलीफायर के रूप में होता है। ट्रांजिस्टर का उपयोग सामान्य से उपयोग में एनालॉग, डिजिटल स्विच, पावर रेगुलेटर, मल्टीवाइब्रेटर, विभिन्न सिगनल जेनरेटर, सिग्नल एंपलीफायर, और उपकरण नियंत्रक के रूप में किया जाता है।

Types of Transistor | ट्रांजिस्टर के प्रकार

ट्रांजिस्टर दो प्रकार के होते हैं N-P-N और P-N-P तो चलिए इसके बारे में जानते हैं।

1. N-P-N :- इसमें P type के परत को N प्रकार के परतों के बीच में लगाया जाता है यानी किसी Transistor में P type के परत को N टाइप के परतों के बीच रखा जाए तो इसे N-P -N Transistor कहते हैं।

इसमें Electron Base Terminal के जरिए Collector से Ammeter के ओर बहते हैं। N-P-N Transistor में 2 N क्षेत्र होते हैं। जिनको एक पतले से P क्षेत्र से विभाजित किया जाता है।

N-P-N कमजोर Signal को amplifier करके base के तरफ भेजता है। और ये मजबूत amplifier को collector के छोर पर बनाता है। N-P-N Transistor में Electron की Speed की Direction Ammeter से Collector तक ही सीमित होती हैं। जिस वजह से Transistor करंट उत्पन्न होता है।

इस तरह के Transistor का इस्तेमाल Circut में किया जाता है। क्योंकि इसमें Majority Charge इलेक्ट्रॉन होते हैं यानी इलेक्ट्रॉन की अधिकता होती हैं। जबकि Minority Charge holes होते हैं। दोनों जंक्शन में P common हो जाता है। इसीलिए इसको N-P-N Transistor कहते हैं। इसमें P base होता है, छोटा N Ammeter और बड़ा N Collector होता है। इसमें करंट collector से Ammeter की ओर बहता है। इस Transistor में Base एक Controler की तरह काम करता है। Base पर जितने सिग्नल भेजे जाते है उसके अनुसार कलेक्टर से Ammeter को तरफ बहने लगता है। इसे अच्छी तरह समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। 

आपने स्कूल, घर, Collage हर जगह पानी का नल देखा होगा जिसके लिए ऊपर छत पर पानी की टंकी रखी होती हैं और पाइप से पानी को नीचे लाया जाता है जिसमे से पानी बहता है और बहता ही रहेगा जब तक को उसमे नल न लगा हो। नल को बंद कर देने पर पानी नही बहता जब आपको जरूरत होती हैं तभी नल को खोल कर पानी ले लेते हैं फिर जरूरत नहीं होने पर बंद कर देते है। साथ ही आपको कम पानी चाहिए तब खोलते हैं और ज्यादा पानी के लिए ज्यादा या पूरा खोल देते हैं। ठीक इसी प्रकार से Transistor भी काम करता है और Base उसको नियंत्रित करता है।

2. P-N-P :- P-N-P Transistor में 2 P क्षेत्र होते हैं। जिनको एक पतले से N क्षेत्र से विभाजित किया जाताा है। इस Transistor में Base से निकला हुआ कम Amount का करंट Ammeter और Collector करंट को नियंत्रित करने का कार्य करता है।

P-N-P Transistor दो crystal डायोड होते हैं। जो कि एक के पीछे के जुड़े होते हैं। बाए तरफ के left डायोड को Ammeter Base डायोड कहा जाता है और दाएं तरफ के डायोड Collector Base डायोड कहा जाता है।

Field-effect Transistor (FET) का दूसरा प्रकार है और इसमें भी तीन सिरे होते हैं। Gate, Drain और Source इस ट्रांजिस्टर को आगे भी बनाया गया है। जैसे Junction Field Effect Transistor (JFET)

 और MOSFET Transistor का उपयोग Multiplexer में भी किया जाता है। इसको phase Shift ओरिएंटर में भी इस्तेमाल किया जाता है।

Field Effect Transistor दो प्रकार के होते हैं। junction field effect transistor एक Semi cunductor चालक है जिसके तीन टर्मिनल होते हैं और ये electronic control switch, voltage control register और amplifier में इस्तेमाल किया जाता है। ये एक unipolar उपकरण है इसका मतलब यह है कि यह एक समय में electron या hole पर निर्भर करेगा।

इसकी छोटी आकर के वजह से ये Transistor circuit में काफी कम जगह में फिट हो जाता है। Transistor Radiation से बचाने का भी काम करता है। Metal oxide field effect transistor एक सेमीकंडक्टर डिवाइस है। जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को स्विचिंग सिंगनल को एम्प्लीफाई करने के लिए किया जाता है।

oxide field effect transistor का इस्तेमाल हाई फ्रिकवेंसी एंपलीफायर की तरह किया जाता है। इसका इस्तेमाल स्विच और पावर सप्लायर में किया जाता है।

Darlington transistor जिसे कभी-कभी डार्लिंगटन जोरी कहा जाता है। यह ट्रांजिस्टर सर्किट होता है जिसे दो ट्रांजिस्टर से बनाया जाता है। सिडनी डार्लिंगटन ने इस ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया था। यह एक ट्रांजिस्टर की तरह है इसमें करंट हासिल करने की क्षमता बहुत अधिक है।

समझते हैं सर्किट सिर्फ दो ट्रांजिस्टर से भी बनाया जा सकता है या 1-1 सर्किट के अंदर हो सकता है। डार्लिंगटन ट्रांजिस्टर के साथ hef parameters hef को एक दूसरे के साथ गुणा किया जाता है। Circuit Oreo Envire में या एक जहाज में सहायक है जो पानी के माध्यम से जाने वाले बहुत छोटे प्रभाव को मापता है। ये इतना सेंसिटिव होता है कि ये स्किन में करंट उठा सकता है। यदि आप इसे मेटल के टुकड़े से जोड़ते हैं तो आप एक स्पर्श संवेदनशील बटन बना सकते हैं।

क्या आप Schottky Transistor के बारे में जानते हैं। Transistor और Shottky Transistor संयोजन है जो चरम इनपुट पर मान को डाइवर्ट करके Transistor को संतृप्त होने से रोकता है। इसे Shotsky-Clamped Transistor भी कहा जाता है।

Multiple Ammeter Transistor एक द्विध्रुवीय ट्रांजिस्टर है जिसे अक्सर Transistor Transistor Logic  (TTL) Nand लॉजिक gate input के रूप में उपयोग किया जाता है। इनपुट सिगनल मीटर लगाए जाते हैं यदि सभी उत्सर्जन तार्किक वोल्टेज द्वारा संचालित होते हैं तो कलेक्टर वर्तमान प्रवाह बंद हो जाता है इस प्रकार के एकल ट्रांजिस्टर का प्रयोग करके एक NAND Logic Gate का प्रदर्शन होता है।

इसमें मल्टीपल एमीटर ट्रांजिस्टर डीटीएल के जगह लेते हैं और स्विचिंग समय बिजली upback करने के लिए सहमत होते हैं। BJT एक तीन लीड डिवाइस है जिसमें Ammeter, Base और Collector होते हैं। BJT एक वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। BJT के अंदर दो पीएन जंक्शन मौजूद है। पीएन जंक्शन एमिटर और बेस के बीच मौजूद हैं। दूसरा जंक्शन कलेक्टर और बेस के बीच मौजूद है। वर्तमान प्रभाव एमिटर टू बेस माइक्रो एम्प के द्वारा मापा जाता है की थोड़ी सी मात्रा एमीटर से कलेक्टर मिली मीटर से मापा जाने वाला कलेक्टर वर्तमान के माध्यम से काफी बड़ा प्रभाव को नियंत्रित कर सकती है।

Bipolar Trasistor यानी कि द्विध्रुवी ट्रांजिस्टर इसके दुर्गों के संदर्भ में पदार्थ प्रकृति में उपलब्ध है। एनपीएन में n-type सेमीकंडक्टर सामग्री का एक मीटर और कलेक्टर है और आधार टाइप पी टाइप सेमीकंडक्टर है। जबकि पीएनपी में इसके विपरीत होता है। ए मीटर और कलेक्टर के बीच में पी टाइप अर्धचालक सामग्री है और आधार एंड टाइप सामग्री हैं। पीएनपी और एनपीएम ट्रांजिस्टर के अनिवार्य कार्य समान है लेकिन प्रत्येक कार्य के लिए पिछले की आपूर्ति उलट जाती है। इन दोनों प्रकार के बीच एकमात्र अंतर यह है कि एनपीएन ट्रांजिस्टर में पीएनपी ट्रांजिस्टर के तुलना में उच्च आवृत्ति प्रक्रिया होती है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन का प्रवाह छिद्र की तुलना में अधिक होता है।

सामान्य बीजेटी ऑपरेशन में बेस एनिमेटर जंक्शन फार्मर biased है और PN junction collector biased जबकि ए मीटर जंक्शन से करंट प्रभावित होता है। तो कलेक्टर सर्किट में भी करंट प्रभावित होता है। यह बे सर्किट में एक बार और अनुबाधिक हैं और ऐसे होने के लिए समझाने के लिए एनपीएन ट्रांजिस्टर का उदाहरण दिया जाता है। समान सिद्धांतों का उपयोग पीएनपी ट्रांजिस्टर के लिए किया जाता है। सिवाय इसके वर्तमान वाहक इलेक्ट्रॉन के जगह छिद्र है और वाहक एक दूसरे के उल्टा है।

ट्रांजिस्टर एकीकृत सर्किट के बुनियादी भवन ब्लॉक है अधिकांश अप टू डेट इलेक्ट्रॉनिक्स है। ट्रांजिस्टर का एक प्रमुख अनुप्रयोग microprocessor प्रोसेसर के चिप में एक अरब से भी अधिक Transistor शामिल होते हैं।

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धन्यवाद

जय हिंद!

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